उम्र के साथ गाल अंदर धंसने लगे हैं? जानें स्कल्प्ट्रा कैसे खोई हुई भरावट लौटाता है
उम्र बढ़ने के साथ गालों की भरावट कम होना चेहरे में होने वाला एक आम बदलाव है। इसके पीछे चेहरे की चर्बी, कोलेजन और हड्डियों में होने वाले बदलाव हो सकते हैं। स्कल्प्ट्रा एक इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट है, जो त्वचा में प्राकृतिक कोलेजन बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। इस लेख में जानेंगे कि गाल अंदर क्यों धंसते हैं, स्कल्प्ट्रा कैसे काम करता है और कोलकाता में प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जरी के तहत कौन-से विकल्प उपलब्ध हैं।
उम्र बढ़ने पर गाल अंदर क्यों धंसने लगते हैं?
गालों का अंदर धंसना आमतौर पर किसी एक वजह से नहीं होता। समय के साथ चेहरे में कई बदलाव होते हैं, जिनका असर गालों की भरावट पर पड़ता है।
| क्या बदलता है? | शरीर में क्या होता है? | चेहरे पर क्या असर दिखता है? |
| चेहरे की चर्बी | चर्बी की परतें कम हो सकती हैं और नीचे की ओर खिसक सकती हैं | गाल चपटे दिखने लगते हैं और मुस्कान के आसपास की रेखाएं गहरी हो सकती हैं |
| कोलेजन | कोलेजन बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है | त्वचा पतली और कम कसी हुई लग सकती है |
| चेहरे की हड्डियां | हड्डियों का कुछ आयतन धीरे-धीरे कम हो सकता है | गालों को मिलने वाला अंदरूनी सहारा कम हो सकता है |
क्या उम्र ही गालों के अंदर धंसने की एकमात्र वजह है?
नहीं। गालों की भरावट कम होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं:
- बहुत ज्यादा या तेजी से वजन कम होना
- प्राकृतिक रूप से पतला चेहरा होना, जो परिवार में भी देखा जा सकता है
- लंबे समय तक धूप में रहना और धूम्रपान करना
- कुछ बीमारियां या ऐसी दवाएं, जिनका असर चेहरे की चर्बी पर पड़ सकता है
एक जरूरी बात: अगर आपके गाल अचानक अंदर धंसने लगे हैं और इसके साथ बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम हो रहा है या लगातार थकान महसूस होती है, तो पहले डॉक्टर से जांच करवाएं। किसी भी कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के बारे में सोचने से पहले स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या का पता लगाना जरूरी है।
क्या चेहरे की एक्सरसाइज से धंसे हुए गाल ठीक हो सकते हैं?
एक शोध के अनुसार, 40 से 65 वर्ष की महिलाओं ने 20 सप्ताह तक चेहरे की एक्सरसाइज की। इसके बाद उनके गालों के ऊपरी और निचले हिस्सों में भराव बढ़ा हुआ दिखाई दिया। हालांकि, इस अध्ययन में प्रतिभागियों की संख्या कम थी और तुलना करने के लिए कोई अलग समूह नहीं था।
चेहरे की एक्सरसाइज से कुछ लोगों में गालों की बनावट में सुधार हो सकता है, लेकिन इससे खोई हुई चर्बी या हड्डियों का आयतन वापस नहीं आता। इसके असर को लेकर अभी और शोध की जरूरत है।
चेहरे की त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान आदतें भी मददगार हो सकती हैं:
- रोजाना सनस्क्रीन लगाएं।
- धूम्रपान से बचें।
- वजन को स्थिर रखने की कोशिश करें।
- पर्याप्त नींद लें।
स्कल्प्ट्रा क्या है और यह कैसे काम करता है?
स्कल्प्ट्रा एक इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट है, जिसमें पॉली-L-लैक्टिक एसिड (PLLA) का इस्तेमाल होता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, PLLA त्वचा में कोलेजन बनने में मदद करता है। यह पदार्थ कुछ दिनों में शरीर द्वारा अवशोषित हो जाता है और त्वचा की कोशिकाओं को नया कोलेजन बनाने के लिए प्रेरित करता है। समय के साथ कोलेजन बढ़ने से चेहरे की भरावट में धीरे-धीरे सुधार दिखाई दे सकता है।
स्कल्प्ट्रा एक नजर में
| सवाल | जवाब |
| इसमें क्या होता है? | पॉली-L-लैक्टिक एसिड (PLLA) |
| यह कैसे काम करता है? | शरीर में प्राकृतिक कोलेजन बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है |
| असर कब दिखाई देता है? | कई हफ्तों में धीरे-धीरे |
| क्या आराम करने के लिए लंबा समय चाहिए? | आमतौर पर ज्यादा समय नहीं, लेकिन व्यक्ति के अनुसार फर्क हो सकता है |
| क्या इसका असर हमेशा रहता है? | नहीं |
क्या स्कल्प्ट्रा धंसे हुए गालों के लिए सही विकल्प है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि गालों की भरावट कितनी कम हुई है, त्वचा की स्थिति कैसी है और आप किस तरह का बदलाव चाहते हैं।
किन लोगों के लिए स्कल्प्ट्रा एक विकल्प हो सकता है?
- जिनके गालों की भरावट हल्के से मध्यम स्तर तक कम हुई है
- जो धीरे-धीरे दिखने वाले बदलाव को पसंद करते हैं
- जिनका सामान्य स्वास्थ्य अच्छा है
- जो एक से ज्यादा ट्रीटमेंट सेशन करवाने के लिए तैयार हैं
किन स्थितियों में दूसरा विकल्प बेहतर हो सकता है?
- स्कल्प्ट्रा में मौजूद किसी सामग्री से एलर्जी होने पर
- पहले से उभरे हुए या असामान्य निशान बनने की समस्या होने पर
- ट्रीटमेंट वाली जगह पर सक्रिय मुंहासे, संक्रमण या त्वचा पर चकत्ते होने पर
- तुरंत बदलाव देखने की इच्छा होने पर
- जब मुख्य समस्या त्वचा का ढीला पड़ना हो
- गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान, जब ट्रीटमेंट के सही समय पर डॉक्टर से चर्चा करना जरूरी है
सही विकल्प चुनने के लिए डॉक्टर से अपनी मेडिकल हिस्ट्री और अपेक्षाओं पर चर्चा करें।
स्कल्प्ट्रा ट्रीटमेंट के दौरान क्या होता है?
स्कल्प्ट्रा का सेशन आमतौर पर कुछ चरणों में पूरा किया जाता है:
- परामर्श: डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी, जरूरतों और अपेक्षाओं के बारे में पूछते हैं। जरूरत पड़ने पर तस्वीरें भी ली जाती हैं।
- ट्रीटमेंट की योजना: जिन हिस्सों में ट्रीटमेंट करना है, उन्हें चिन्हित किया जाता है।
- आराम की तैयारी: त्वचा को साफ किया जाता है और जरूरत के अनुसार सुन्न करने वाली क्रीम लगाई जाती है।
- इंजेक्शन: त्वचा के नीचे छोटी-छोटी मात्रा में इंजेक्शन दिए जाते हैं।
- ट्रीटमेंट के बाद की देखभाल: घर पर किन बातों का ध्यान रखना है, इसकी जानकारी दी जाती है।
ट्रीटमेंट के बाद आमतौर पर दी जाने वाली सलाह:
- डॉक्टर के बताए तरीके से उस हिस्से की हल्के हाथों से मालिश करें।
- सूजन कम करने के लिए ठंडी सिकाई करें।
- कम से कम 24 घंटे तक भारी एक्सरसाइज या ज्यादा मेहनत वाले काम से बचें।
- लालिमा ठीक होने तक त्वचा को धूप से बचाएं।
कितने सेशन की जरूरत होती है और असर कब दिखता है?
स्कल्प्ट्रा आमतौर पर कई सेशन में दिया जाता है। इनके बीच कुछ हफ्तों का अंतर रखा जा सकता है। सेशन की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि चेहरे की भरावट कितनी कम हुई है और ट्रीटमेंट से क्या हासिल करना है।
| समय | क्या बदलाव दिख सकता है? |
| ट्रीटमेंट के तुरंत बाद | सूजन के कारण गाल कुछ समय के लिए भरे हुए दिख सकते हैं। सूजन कुछ दिनों में कम हो सकती है। |
| एक सेशन के 4–6 सप्ताह बाद | उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस सेशन का पूरा असर इस दौरान दिखाई देने लग सकता है। |
| अगले कुछ महीनों में | कोलेजन बनने के साथ धीरे-धीरे बदलाव दिख सकता है। |
| लंबे समय तक | इसका असर दो साल से ज्यादा समय तक रह सकता है। |
परिणाम व्यक्ति की त्वचा, उम्र और शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार अलग हो सकते हैं।
स्कल्प्ट्रा और डर्मल फिलर्स में क्या अंतर है?
स्कल्प्ट्रा और डर्मल फिलर्स, दोनों का इस्तेमाल चेहरे की खोई हुई भरावट को बेहतर करने के लिए किया जा सकता है। लेकिन दोनों के काम करने का तरीका अलग है।
| खासियत | स्कल्प्ट्रा (PLLA) | हायलूरोनिक एसिड फिलर्स |
| कैसे काम करता है? | शरीर में कोलेजन बनने को बढ़ावा देता है | सीधे उस हिस्से में भरावट जोड़ता है |
| असर कब दिखता है? | कई हफ्तों में धीरे-धीरे | आमतौर पर ट्रीटमेंट के तुरंत बाद |
| क्या इसका असर खत्म किया जा सकता है? | इसे घोलने वाला कोई सामान्य रिवर्सल इंजेक्शन नहीं है | कुछ हायलूरोनिक एसिड फिलर्स को विशेष इंजेक्शन से घोला जा सकता है |
| कितने सेशन लग सकते हैं? | आमतौर पर कई सेशन | अक्सर एक सेशन, जरूरत के अनुसार बाद में टच-अप |
| किसके लिए चुना जा सकता है? | जो धीरे-धीरे बदलाव चाहते हैं | जो जल्दी दिखने वाला बदलाव चाहते हैं |
धंसे हुए गालों के लिए सर्जरी कब एक विकल्प हो सकती है?
इंजेक्शन से दिए जाने वाले ट्रीटमेंट चेहरे के खोए हुए भराव को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन अगर त्वचा भी ढीली पड़ गई है, तो डॉक्टर सर्जरी के विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं।
- फैट ग्राफ्टिंग: शरीर के किसी दूसरे हिस्से से अपनी चर्बी लेकर उसे गालों में लगाया जाता है।
- फेसलिफ्ट या मिड-फेस लिफ्ट: चेहरे के ढीले पड़े टिश्यू को ऊपर उठाकर सही स्थिति में लाने की प्रक्रिया।
कोलकाता में प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जरी के तहत इन विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, खासकर जब गालों की भरावट कम होने के साथ त्वचा भी ढीली पड़ गई हो। प्रक्रिया का चुनाव डॉक्टर की जांच के बाद किया जाता है।
स्कल्प्ट्रा के क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं?
किसी भी ट्रीटमेंट की तरह स्कल्प्ट्रा के भी कुछ संभावित साइड इफेक्ट हो सकते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक की जानकारी के अनुसार, इनमें शामिल हैं:
आम और कुछ समय में ठीक होने वाले साइड इफेक्ट:
- सूजन
- नील पड़ना
- दर्द या छूने पर संवेदनशीलता
- खुजली
कम आम समस्याएं:
- त्वचा के नीचे छोटी गांठें बनना
- त्वचा के रंग में बदलाव
इसलिए कोलकाता में किसी अनुभवी और योग्य कॉस्मेटिक सर्जन से ट्रीटमेंट करवाना महत्वपूर्ण है।
इन स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करें:
- नील पड़ने के निशान एक सप्ताह से ज्यादा समय तक बने रहते हैं।
- तेज दर्द हो और उसमें सुधार न आए।
- कोई गांठ बनी रहे या उसका आकार बढ़ने लगे।
हर चेहरे पर उम्र का असर अलग होता है
उम्र बढ़ने के साथ गालों की भरावट कम होना एक सामान्य बदलाव है। इसे बेहतर करने के लिए रोजमर्रा की देखभाल से लेकर इंजेक्शन और सर्जरी तक कई विकल्प उपलब्ध हैं। स्कल्प्ट्रा भी एक विकल्प है, जो शरीर में प्राकृतिक कोलेजन बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देकर धीरे-धीरे असर दिखाता है।
किसी भी ट्रीटमेंट का फैसला लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह कैसे काम करता है और उससे क्या उम्मीद की जा सकती है। अगर आप अपने चेहरे में आए बदलावों को लेकर कोई ट्रीटमेंट करवाने की सोच रहे हैं, तो कोलकाता में प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जरी के विशेषज्ञ से परामर्श करके अपनी त्वचा और जरूरतों के अनुसार सही विकल्प समझ सकते हैं।
लेखक:
डॉ. वी. एस. राठौर
एम.बी.बी.एस. (ऑनर्स), एम.एस., एम.सीएच.
प्लास्टिक, कॉस्मेटिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या स्कल्प्ट्रा का असर हमेशा रहता है?
नहीं। इसका असर दो साल से ज्यादा समय तक रह सकता है, लेकिन यह स्थायी नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ कोलेजन धीरे-धीरे कम होता रहता है। कुछ लोग असर बनाए रखने के लिए दोबारा सेशन करवाना चुनते हैं। हालांकि, परिणाम हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं।
2. अगर मुझे स्कल्प्ट्रा का परिणाम पसंद न आए, तो क्या इसे घोला जा सकता है?
हायलूरोनिक एसिड फिलर्स के विपरीत, स्कल्प्ट्रा को किसी विशेष इंजेक्शन से घोलकर हटाया नहीं जा सकता। इसलिए ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर से विस्तार से चर्चा करना जरूरी है। धीरे-धीरे सेशन करवाने से हर चरण के बाद बदलाव का आकलन करने का मौका मिलता है।
3. क्या स्कल्प्ट्रा ट्रीटमेंट में दर्द होता है?
ज्यादातर लोगों को हल्का दबाव या कुछ पल के लिए सुई चुभने जैसा महसूस हो सकता है। आराम के लिए इंजेक्शन से पहले सुन्न करने वाली क्रीम लगाई जा सकती है। ट्रीटमेंट के बाद हल्का दर्द या संवेदनशीलता आमतौर पर कुछ दिनों में कम हो जाती है।
4. क्या स्कल्प्ट्रा आंखों के नीचे या होंठों पर लगाया जा सकता है?
स्कल्प्ट्रा का इस्तेमाल आमतौर पर आंखों के नीचे या होंठों पर नहीं किया जाता। इन जगहों की त्वचा पतली होती है और लगातार हिलती रहती है, जिससे गांठें दिखाई देने का जोखिम बढ़ सकता है। इन हिस्सों के लिए जांच के बाद दूसरे ट्रीटमेंट विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
5. स्कल्प्ट्रा ट्रीटमेंट के बाद काम पर कब लौट सकते हैं?
कई लोग उसी दिन काम पर लौट सकते हैं। हालांकि, कुछ दिनों तक हल्की सूजन, लालिमा या नील पड़ने के निशान दिखाई दे सकते हैं। कम से कम 24 घंटे तक भारी एक्सरसाइज से बचें और डॉक्टर द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करें।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे डॉक्टर की व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। ट्रीटमेंट के परिणाम हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। किसी भी प्रक्रिया को शुरू करने से पहले अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लें।


